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एयरो इण्डिया-2017 प्रदर्शनी में रूसी विमानों ने सनसनी फैलाई

इसमें कोई सन्देह नहीं है कि बेंगलुरू के निकट येलाहंका वायुसैनिक अड्डे पर हाल ही में ख़त्म हुआ एयरो इण्डिया-2017 अन्तरराष्ट्रीय एयर शो वास्तव में भारत के शक्तिशाली विमानन उद्योग का एक बेहतरीन प्रदर्शन था। इस एयर शो ने दिखाया कि आने वाले दशकों में भारत एक प्रमुख हवाई शक्ति बन जाएगा। यहाँ हम उन अनुबन्धों की चर्चा नहीं कर रहे हैं, जिनपर इस एयर शो के दौरान हस्ताक्षर किए गए या  जिन पर अभी हस्ताक्षर किए जाने हैं। यहाँ तो हम पाँच दिन तक चली इस प्रदर्शनी की आँखों देखी घटनाओं की चर्चा करेंगे।

दो साल में एक बार होने वाले इस एयर शो में 750 से अधिक विदेशी और घरेलू कम्पनियों और संगठनों ने भाग लिया। इस साल यह प्रदर्शनी विदेशी सहभागी कम्पनियों के लिए अचानक इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई थी क्योंकि भारतीय वायुसेना ने प्रदर्शनी से पहले 400  मध्यम बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान ख़रीदने की घोषणा कर दी थी। ’मेक इन इण्डिया’ की अपनी नीति के तहत भारत सरकार इन विमानों का निर्माण स्वदेश में ही करना चाहती है। विदेशी विमानन कम्पनियाँ भारत से यह निविदा पाने के लिए आपस में होड़ कर रही हैं।

दक्षिण एशिया में रूस की वापसी

लड़ाकू विमानों के इस बड़े आदेश को पाने के लिए होड़ करते हुए अमरीकी कम्पनी लॉकहीड मार्टिन अपने पुराने एफ -16 विमान को लेकर इस प्रदर्शनी में शामिल हुई थी। अमेरिकी प्रशान्त महासागरीय सैन्य कमान के अधिकारी इस विमान को उड़ाकर बेंगलुरु तक लाए थे। लॉकहीड मार्टिन ने यह वायदा किया कि वह भारत में ही इस विमान के उत्पादन का कारख़ाना लगा देगी। लेकिन प्रदर्शनी में दर्शकों का सबसे ज़्यादा ध्यान स्वीडन के एक इंजन वाले नवीनतम साब ग्रिपेन जेएएस नामक लड़ाकू विमान की ओर आकर्षित था। स्वीडन की इस कम्पनी ने भी भारत में इस विमान का उत्पादन शुरू करने की तत्परता व्यक्त की। 

लेकिन एयर शो के ज़्यादातर भारतीय दर्शकों का ध्यान रूस के मिग-35 विमान की ओर केन्द्रित था। सोशल मीडिया में तो मिग-35 के पक्ष में कही जाने वाली बातों ने एक अभियान का रूप ही ले लिया। भारत के रक्षामन्त्री मनोहर पर्रिकर ने भी इस बारे में अपनी टिप्पणी की। लेकिन एफ़-16 विमान से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने अमरीकी कम्पनी लॉकहीड मार्टिन से कहा कि वह पहले ’अपनी सरकार से इस बारे में बात करे’। उनका मतलब अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की इस नीति से था कि अमरीका  पहले अपने यहाँ नौकरियों को बनाए रखने पर ज़ोर देगा।

हालाँकि विगत 27 जनवरी को रूस ने मास्को के निकट स्थित लुख़ोवित्स्की मिग विमान निर्माण कारख़ाने में अपने नए विमानों को प्रदर्शित करते हुए दो इंजनों वाले अपने बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान मिग-35 के नवीनतम मॉडल को पेश नहीं किया था, लेकिन रूस के उपप्रधानमन्त्री दिमित्री रगोज़िन ने कहा कि रूस प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के ’मेक इन इण्डिया’ (भारत में बनाओ) कार्यक्रम के अन्तर्गत भारत में इस विमान का उत्पादन करने को तैयार है।  

एयरो इण्डिया-2017  प्रदर्शनी में भाग लेने वाली विदेशी कम्पनियों के मण्डपों में रूस का मण्डप सबसे बड़ा था। रूस को ’मेक इन इण्डिया’ का सबसे ज़्यादा अनुभव है। भारत के हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड के नासिक कारख़ाने में 600 से ज़्यादा सुपरसोनिक मिग-21 विमानों का  उत्पादन किया जा चुका है। इसके अलावा आजकल भारत में अत्याधुनिक सुखोई एसयू-30 एमकेआई बहुउद्देशीय लड़ाकू विमानों का उत्पादन भी किया जा रहा है।

आलोपन तकनीक वाले भारतीय लड़ाकू विमानों के विकास में रूस की महती भूमिका

भारत और रूस की सँयुक्त कम्पनी ’ब्रह्मोस एयरोस्पेस’ भी भारत-रूस सहयोग के क्षेत्र में एक ऐसा उदाहरण है,  जिसका दूसरे देश भी अनुसरण कर सकते हैं।

अपने मिग-29 और एसयू-30एसएम लड़ाकू विमानों पर भी रूसी रक्षा उद्योग को गर्व है। इन दिनों सीरिया में आतंकवादी गिरोहों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे सैन्य अभियान में इन लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है और उन्होंने अपनी उपयोगिता सिद्ध कर दी है। 

दक्षिण भारत में बेंगलुरु में सम्पन्न हुए एयर शो में लगे रूसी मण्डप में रूस ने अपने 300 से ज़्यादा सैन्य उत्पाद प्रदर्शित किए, जिनमें पाँचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के मॉडल और इलेक्ट्रानिक युद्ध सूट से लेकर अगली पीढ़ी के जेट इंजन और अत्यधिक संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रक्षा के लिए इस्तेमाल किए जा सकने वाले संवेदकों (सेंसर) तक तरह-तरह के सैन्य उपकरण और सैन्य उत्पाद शामिल थे।

बेंगलुरु के लोकप्रिय और अग्रणी अख़बार ’डेक्कन क्रॉनिकल’ ने एयर शो में रूस की सहभागिता को रेखांकित करते हुए लिखा —  शोरशराबे के बीच जारी एयरो इण्डिया 2017 प्रदर्शनी में लगे रूसी मण्डप में दर्शकों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है। रूसी मण्डप इतना विशाल और ख़ूबसूरत है कि ऐसा लग रहा है कि रूसी लोग पूरी तैयारी के साथ एयर-शो में भाग लेने के लिए आए हैं।  

जल्दी ही भारत के आकाश में उड़ेगा मिग-35 लड़ाकू विमान

रूस के सैन्य तकनीकी सहयोग संघीय सेवा के महानिदेशक व्लदीमिर द्रझोफ़ के नेतृत्व में 300 सदस्यों वाले रूस के एक बड़े प्रतिनिधिमण्डल ने एयर इण्डिया-2017 प्रदर्शनी में भाग लिया। रूसी रक्षा उद्योग के ’रोसतेख़’ निगम के अन्तरराष्ट्रीय सहयोग विभाग के प्रमुख वीक्तर क्लादफ़ और विदेशों को रक्षा उत्पादों का निर्यात करने वाली रूसी कम्पनी ’रोस-अबारोन-एक्सपोर्त’ के उपमुख्य प्रबन्धक सिर्गेय गरेस्लावस्की भी इस प्रतिनिधिमण्डल में शामिल थे।

पश्चिमी मीडिया की मुख्यधारा में शामिल पत्र-पत्रिकाओं और टेलीविजन चैनलों द्वारा रूस के बारे में लगातार नकारात्मक अभियान चलाने और सोशल मीडिया में रूस के ख़िलाफ़ उकसावे भरी पोस्टों के कारण बेंगलुरु के येलाहंका वायुसैनिक अड्डे के भारतीय पत्रकारों से ठसाठस भरे हाल में हुए सँयुक्त संवाददाता सम्मेलन में रूस के उच्चाधिकारियों से बहुत से विवादास्पद सवाल पूछे गए।

उल्लेखनीय है कि भारत ने 2016 में रूस को कुल 4.6 अरब डॉलर के हथियार ख़रीदने का आर्डर दिया है और आज भारत रक्षा उत्पादों के क्षेत्र में रूस का सबसे बड़ा सहयोगी है। सिर्गेय गरेस्लावस्की ने बताया कि अगर भावी परियोजनाओं को भी ध्यान में रखा जाए तो दो देशों के बीच सहयोग अभी और ज़्यादा अच्छे ढंग से विकसित होगा। 

उन्होंने ज़ोर दिया कि रूस भारत के सामने हर तरह के हथियारों और सुरक्षा प्रणालियों की एक पूरी शृंखला पेश करने के लिए तैयार है। 

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ब्रह्मोस और एसयू-30एमकेआई 

रूस और भारत की सँयुक्त कम्पनी ’ब्रह्मोस एयरोस्पेस’ को ’मेक इन इण्डिया’ कार्यक्रम के अन्तर्गत कार्यरत सबसे अच्छा उदाहरण मानते हुए द्रझोफ़ ने कहा कि एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमानों पर ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलों की तैनाती से सम्बन्धित काम सफलतापूर्वक किया जा रहा है। जैसे ही इस सिलसिले में किए जा रहे सारे परीक्षण पूरे हो जाएँगे, हम विदेशी ख़रीददारों के सामने भी ’ब्रह्मोस’ मिसाइल ख़रीदने की पेशकश करेंगे।  

उन्होंने कहा — रूसी वायुसेना के पास उपस्थित एसयू-30 विमानों को भी सँयुक्त रूप से विकसित इस ’ब्रह्मोस’ मिसाइल से लैस करने की पेशकश की जाएगी।

बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान

सच-सच कहूँ तो एयरो-इण्डिया-2017 में इस बार बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान ख़रीदने की भारत की इच्छा का असर ही चारों तरफ़ दिखाई दे रहा था। 126 विमानों की ख़रीद से जुड़ी भारत की निविदा जीतने वाली फ़्राँसीसी कम्पनी डेसॉल्ट राफ़ेल के विमानों की आपूर्ति में असफल रहने के बाद भारत ने उसके साथ सिर्फ़ 36 विमान ख़रीदने का सौदा किया। अब भारतीय वायुसेना फिर से यह जानना चाहती है कि कौन-कौन सी अन्तरराष्ट्रीय विमान निर्माता कम्पनियाँ भारत की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तैयार हैं।   रूस अपने नवीनतम मिग-35 लड़ाकू विमान की पेशकश करने जा रहा है। और वह भारतीय वायुसेना की ज़रूरतों को जानने का इन्तज़ार कर रहा है ताकि उसकी ज़रूरतों के हिसाब से अपनी पेशकश तैयार करके भेज सके।  

रूस के सँयुक्त विमानन निगम के उपाध्यक्ष अलिक्सान्दर तुलिकोफ़ ने कहा — ये विमान एकदम नई क़िस्म के विमान हैं। बहुउद्देशीय लड़ाकू विमानों की भारत द्वारा पहले मंगाई गई निविदा के लिए हमने जिस विमान की पहले पेशकश की थी, आज के मिग-35 उनसे कहीं ज़्यादा उन्नत और श्रेष्ठ हैं। 

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बहुत से विशेषज्ञों का कहना है कि दो इंजनों वाला मिग-35 बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान भारत के लिए सबसे उपयुक्त विमान है। यहाँ मैं उन विशेषज्ञों का नाम नहीं लेना चाहता हूँ, जिन्होंने इस तरह का विचार प्रकट किया है क्योंकि तब यह माना जाने लगेगा कि वे रूसी विमान की पैरवी कर रहे हैं। लेकिन रूस के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए यह कहना विवेकसम्मत है कि मिग-29 की जगह मिग-35 विमान ख़रीदने से भारत को न तो अपनी वायुसेना के बुनियादी ढाँचे में कोई बदलाव करना होगा और न ही उसे कोई अतिरिक्त खर्चे करने होंगे। इस तरह बहुत कम खर्च में भारत की वायुसेना को अत्याधुनिक बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान मिल जाएँगे। 

इस सौदे में सबसे अच्छी बात यह होगी कि यह सौदा राजनीतिक रूप से पूरी तरह से जोखिम मुक्त रक्षा सौदा होगा क्योंकि रूस ने दुपक्षीय आपसी रिश्तों में कभी भी किसी तरह के कोई प्रतिबन्ध नहीं लगाए हैं।

इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं।

भारतीय पत्रकार  विनय शुक्ला  पिछले चालीस  साल से भी अधिक समय से रूस के बारे में लिख रहे हैं। इस लेख में व्यक्त विचार उनके निजी विचार हैं। उनके अन्य लेख पढ़ने के लिए यहाँ पर जाएँ।

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